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निवेश और रोजगार में रिकॉर्ड उछाल लाने की बड़ी तैयारी
कोलकाता। बंगाल में औद्योगिक पुनरुद्धार और आर्थिक कायाकल्प की दिशा में नई सरकार ने एक बेहद महत्वाकांक्षी और समयबद्ध कदम उठाया है। सरकार ने आधिकारिक घोषणा की है कि आगामी 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस तक राज्य का एक स्पष्ट, पारदर्शी और व्यापक औद्योगिक रोडमैप तैयार कर लिया जाएगा। इस ऐतिहासिक रोडमैप का प्राथमिक उद्देश्य देश-विदेश से भारी निवेश को आकर्षित करना, उद्योगों के अनुकूल एक नया इकोसिस्टम विकसित करना और राज्य के लाखों युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर नए रोजगार के अवसरों का सृजन करना है।
प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस नए औद्योगिक रोडमैप में सबसे ज्यादा ध्यान निवेशकों के सामने आने वाली बुनियादी व्यावहारिक दिक्कतों को दूर करने पर केंद्रित किया गया है। इसके तहत उद्योगों के लिए जमीन की आसान उपलब्धता, सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम को बेहद चुस्त-दुरुस्त बनाना, विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास, मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और विभिन्न क्षेत्रों को आकर्षक इंसेंटिव (प्रोत्साहन राशि) प्रदान करने जैसे क्रांतिकारी नीतिगत सुधारों को शामिल किया जा रहा है। सरकार को पूरा भरोसा है कि इन युगांतकारी सुधारों के लागू होने से पश्चिम बंगाल पूर्वी भारत में निवेशकों के लिए फिर से नंबर-वन औद्योगिक डेस्टिनेशन बनकर उभरेगा।
इस आगामी रोडमैप की खास बात यह है कि इसमें बंगाल के पारंपरिक उद्योगों को पुनर्जीवित करने के साथ-साथ मॉडर्न सेक्टर्स के संतुलित विकास पर जोर दिया जाएगा। नई रणनीति के तहत इंजीनियरिंग, केमिकल, जूट, लेदर, टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, फूड प्रोसेसिंग और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग सेक्टर के लिए विशेष पैकेज और नीतियां तैयार की जा रही हैं। इसके अलावा दुर्गापुर-आसनसोल का भारी औद्योगिक बेल्ट, हावड़ा का ऐतिहासिक इंजीनियरिंग क्लस्टर, हल्दिया का पेट्रोकेमिकल हब और उत्तर बंगाल के चाय व पर्यटन उद्योग को नई विकास रणनीति में प्रमुखता से शामिल किया जा रहा है।
सरकारी अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि आर्थिक प्रगति के साथ-साथ स्थानीय युवाओं का रोजगार ही सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखकर नई औद्योगिक नीति और दीर्घकालिक विकास के फॉर्मूले को एक साथ धरातल पर उतारा जा रहा है, ताकि घरेलू कॉर्पोरेट घरानों के साथ-साथ बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को भी राज्य में लाया जा सके। आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि इस रोडमैप को तय समय के भीतर प्रभावी ढंग से लागू कर दिया जाता है, तो यह बंगाल की खोई हुई औद्योगिक साख को वापस लाने और राज्य की जीडीपी को नई ऊंचाई पर ले जाने में मील का पत्थर साबित होगा।